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Thursday, September 5, 2013

गुरु के प्रति.......



करते जो ज्ञान दान,
करते जो राष्ट्र – निर्माण,
करके छात्र – चरित्र निर्माण,
सभी गुरुजनों को मेरा शत – शत प्रणाम !

ज्ञान – पिपासा शमन करने को,
आप आये बनके गुरु महान |
हम थे जीवन-पथ से अनभिज्ञ,
आपने ही सिखाया लक्ष्य-संधान |

अज्ञानता दूर कर ज्ञान का प्रकाश दिया,
किया चरित्र-निर्माण, दिया उच्च संस्कार |
सिखलाया काँटों पर चलना, तप में तपना ,
आपने ही जीवन में दिखलाया सद् मार्ग |

जब जब हुए हम उत्साहहीन, तेजहीन,
किया आपने ऊर्जा–संचार, धैर्य प्रदान |
थे अपनी ही क्षमताओं से अनजान,
किया उसे जागृत, आपकी कृपा महान |

स्वयं ईश्वर भी धरा पर लेकर अवतार,
करके शिष्यत्व ग्रहण आपका, हुए कृतार्थ |
करके विद्यार्जन, हुए ज्ञानी पराक्रमी महान ,
करके आपका यश विस्तार, हुए कृतार्थ |

गुरु भक्ति की महिमा है अपरम्पार,
संतों ने किया आपका गुणगान बारम्बार |
करता है ह्रदय आपका वंदन,
आपके चरणों में सहस्र- सहस्र नमन |